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योगी सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल की सरगर्मी तेज?

 Special Coverage News |  12 Sep 2018 2:12 PM GMT  |  दिल्ली

योगी सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल की सरगर्मी तेज?
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लखनऊ। गठबंधन की चुनौतियों और लोकसभा चुनाव की तैयारी को देखते योगी सरकार के मंत्रिमंडल में विस्तार की संभावना बढ़ने लगी है। पिछड़ों और दलितों के सम्मेलन के बाद या इस बीच ही कुछ नये मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है और कसौटी पर खरे नहीं उतरने वाले मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। ऐसे मंत्रियों को विभागों में बदलाव भी किया जा सकता है। हालांकि राजनीतिकों का एक धड़ा इस संभावना को सिरे से नकारता नजर आता है।


उसका मानना है कि चुनावी साल में मंत्रिमंडल में फेरबदल जैसा जोखिम सरकार नहीं उठाना चाहेगी। कुछ पुराने चेहरों की जगह पर अब नए चेहरों को लाने की जरूरत, अवध, कानपुर, गोरखपुर और वेस्ट यूपी के बीच क्षेत्रीय संतुलन, बिखरे विभागों को केंद्र सरकार के विभागों की तरह समन्वयन, यूपी के 95 विखरे विभागों को 57 विभागों में समेटने का प्रस्ताव , उपचुनाव के परिणामों को देखते संतुलन और समन्वय की जरूरत, लोकसभा चुनाव 2019 के पहले ही जातीय समीकरण को ध्यान। नीति आयोग ने उत्तर प्रदेश के बिखरे विभागों को केंद्र सरकार के विभागों की तरह समन्वित करने की अपेक्षा की है। 95 विभागों को 57 विभागों में समेटने का प्रस्ताव है। इस सिलसिले में मुख्यमंत्री कई बार अधिकारियों के साथ बैठककर सलाह मशविरा कर चुके हैं। ऐसी बैठकों में प्रस्ताव के अवलोकन की हिदायतों के बाद मंत्रियों से लेकर सत्ता के गलियारे में मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए विभागों के पुनर्गठन की चर्चा तेज है।


यदि विभागों का पुनर्गठन होता है तो मंत्रिमंडल के आकार में भी बदलाव होगा और उसी के अनुरूप मंत्रयों का समायोजन होगा। फेरबदल की संभावना के चलते मंत्रियों को भी अपने विभाग बदले जाने और छिन जाने का खतरा सताने लगा है। सवा साल की सरकार में कुछ मंत्रियों ने बेहतर रिजल्ट दिए तो कई मंत्री जनता, विधायकों और कार्यकर्ताओं के साथ ही मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन की कसौटी पर भी खरा नहीं उतर सके। अब ऐसे लोगों पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि तजुर्बेकार कहते हैं कि सामने 2019 का लोकसभा चुनाव होने की वजह से मंत्रियों के हटाने का जोखिम सरकार नहीं ले सकती है।


निष्क्रिय और रिजल्ट नहीं दे पाने वाले भारी भरकम विभागों के मंत्रियों को कम महत्वपूर्ण विभाग दिया जा सकता है। वैसे कुछ मंत्रियों के खिलाफ तो पार्टी के ही सांसद, विधायक और कार्यकर्ता मुखर हैं। ऐसे दो-तीन लोगों के हटाये जाने की भी चर्चा चल पड़ी है।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री समेत 25 कैबिनेट मंत्री और नौ स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री हैं। जिस तरह 57 विभागों में ही पुनर्गठन की चर्चा है, उससे यह अंदाजा है कि विभागों का बंटवारा भी इसी अनुरूप होगा। भले पुनर्गठन के क्रियान्वयन में देरी हो लेकिन उसके प्रस्ताव के अनुरूप मंत्रियों को विभाग आवंटित किये जा सकते हैं। 13 राज्यमंत्री हैं। इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।

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