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नई परिवहन नीति के आगे स्कूल हुए बेबस, पत्रकारों के सामने रोया अपना दुखड़ा

धिकांश अभिभावक स्कुलो को समय पर फीस जमा नही करा पाते क्योकि अधिकतर अभिभावक कृषि कार्यो से जुड़े हुए है ?

 Special Coverage News |  21 July 2019 11:49 AM GMT  |  दिल्ली

नई परिवहन नीति के आगे स्कूल हुए बेबस, पत्रकारों के सामने रोया अपना दुखड़ा

जनपद मुज़फ्फरनगर के एक होटल में इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसियेशन ने प्रेसवार्ता कर अपनी समस्याओं से पत्रकारों को अवगत कराया और बताया कि सरकार द्वारा मोटर वाहन नियमावली 2019 26वा संशोधन के द्वारा स्कूल वाहनों के नियमो में भारी परिवर्तन कर दिया है. जो कि बच्चो की सुरक्षा के दृष्टिगत पूर्णतय न्याय संगत व स्वागत योग्य है लेकिन जनपद मुज़फ्फरनगर में लगभग 85 प्रतिशत विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रो में संचालित है. जो शत प्रतिशत स्कूल परिवहन व्यवस्था को लागू किये है जो कि न्यूनतम शिक्षण व परिवहन शुल्क लेकर सरकार की इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर बैठाए हुए है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवा रहे है तथा शिक्षा के क्षेत्र में अपना अमूल्य योगदान विगत वर्षों से देते चले आ रहे है.

अधिकांश अभिभावक स्कुलो को समय पर फीस जमा नही करा पाते क्योकि अधिकतर अभिभावक कृषि कार्यो से जुड़े हुए है इसीलिये अभिभावकों की मजबूरी को समझते हुए हम अपने परिवहन शुल्क में किसी प्रकार की व्रद्धि करने की स्थिति में नही है. पदाधिकारियों ने बताया कि परिवहन नीति से छात्र बस का शुल्क 2000 रुपए से 3000 रुपए व वेन का शुल्क 4000 से 5000 रुपये तक आता है इतना शुल्क परिजन नही दे सकते.

पदाधिकारियों ने बताया कि अब तक जनपद के सभी विद्यालय वाहन नियमो का कड़ाई से पालन कर रहे थे लेकिन अब ये वाहन शुल्क लेना सम्भव नही है और जबसे जनपद मुज़फ्फरनगर एनसीआर में आया है. तो वाहन की लाइफ 5 साल कम हो गयी है ये ओर भी स्कुलो के लिए नुकसान दायक है.

इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसियेशन ने जिला प्रसासन से गुहार लगाई की छात्रों को न्यूनतम शुल्क में सरकारी वाहन से स्कुलो में लाने ले जाने की व्यवस्था जिला प्रसासन उपलब्ध कराए ,प्रेसवार्ता में एसोसियेशन के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे.

पवन अग्रवाल की रिपोर्ट

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