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नोएडा: कोरोना काल मे व्यस्त रहा शासन तो करोड़ो की ठगी कर फरार हुए भूमाफिया

भूमाफियाओं द्वारा कस्टोडियन जमीन बेचकर की करोड़ो की ठगी, पीड़ित डीएम व एसडीएम ऑफिस के लगा रहे है चक्कर

 ललित पंडित |  4 Sep 2020 3:53 PM GMT  |  नोएडा

प्रतीकात्मक तस्वीर
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प्रतीकात्मक 

ललित पंडित

राजधानी से सटे जनपद गौतम बुद्ध नगर में भूमाफिया लोगो को अलग अलग तरह से अपना शिकार बनाते है तो वही शासन प्रशासन भी इनके खिलाफ नकेल कसता रहता है, लेकिन इस कोरोना काल मे शासन व्यस्त रहा तो उधर भूमाफिआयों ने तीन भोले भाले गांववासियों को अपना शिकार बनाते हुए कस्टोडियन की जमीन बेचकर करोड़ो रुपए की ठगी कर फरार हो गए, और जब इस बात की खबर खरीदारों को पड़ी तो वो अब डीएम, एसडीएम आफिस के चक्कर काट रहे हैं। वही इस मामले पर एसडीएम ने सफाई देते हुए कहा कि शासन कुछ महीनों से कोरोना महामारी को लेकर व्यस्त था जिस बजह से इस ओर ध्यान नही दिया लेकिन समय समय सरकारी जमीन पर हुआ अवैध कब्जा को हटाया जाता रहा है हम अब फ्री हुए है जल्द ही पीड़ितों की सुनवाई होगी।

आपको बता दें कि भूमाफियाओं द्वारा कस्टोडियन बेचकर इन भोले भाले लोगो को अपनी ठगी का शिकार बनाने को लेकर ये पीड़ित पिछले कई वर्षों से दादरी तहसील से लेकर जिला अधिकारी दफ्तर के चक्कर काट काट कर पीड़ित थक गए है। लेकिन दादरी तहसील में कोई भी पीड़ित की शिकायत सुनने को तैयार नहीं है कस्टोडियन जमीन को लेकर शासन-प्रशासन ने जिले में भूमाफिया के खिलाफ अभियान चला रखा है। लेकिन ऐसे भी माफिया अभी ग्राम सभा की ही नहीं बल्कि देश की धरोहर कस्टोडियन संपत्त्ति को भी बेचकर करोड़पति बन गए और बार-बार कस्टोडियन जमीन को बेचते है। कस्टोडियन की जमीन बेचने वाले लोग हर बार नए होते हैं। जबकि जमीन के असली मालिक 1949 व 1965 में पाकिस्तान जा चुके हैं। यह खेल अकेले भू माफिया नहीं कर रहे बल्कि इसमें राजस्व अधिकारी पर भी आरोप लगाए गए हैं जारचा क्षेत्र में ऐसे ही तीन लोगों ने डीएम के समक्ष शिकायत की है जिन्होंने कस्टोडिसन जमीन बेचने का आरोप लगाया है।

दरअसल दादरी तहसील में कस्टोडियन संपत्ति बेचने की जानकारी होने पर दो लोगों ने डीएम सुहास एल वाई के समक्ष शिकायत दी है। जिसमें नूरपुर गांव के खाता संख्या 129 के खसरा नंबर 472 को जाहिद हुसैन उर्फ बुद्घन बनकर एक फर्जी व्यक्ति ने 6 बीघा जमीन यशपाल भाटी (बोड़ाकी) को बेच दी। इसके अलावा छोटे नाम के व्यक्ति को भी इसी कस्टोडियन की जमीन बेची गई है। तीसरे पीडि़त समीर पुत्र रफीक अहमद को भी कस्टोडियन की जमीन बेचकर रुपये हड़प लिए। इन्होंने जब अपने नाम की फर्द निकलवाई तो देखा कि उनका नाम खारिज करके कस्टोडियन लिखा गया है। इसके बाद इन लोगों ने शिकायत की है। जारचा क्षेत्र मेंं एक माफिया है जो पांच साल पहले अपनी जमीन को भी बेच चुका था लेकिन उसके बाद भी कस्टोडियन सम्पति बेचने का उपसपर आरोप है। वही राजस्व विभाग के अधिकारियों पर जमीन क्रेताओं का नाम खारिज कर फिर से कस्टोडियन दर्ज करने का आरोप है। पहले कस्टोडियन जमीन के खाते में किसी और व्यक्ति का नाम दर्ज हुआ और फिर दोबारा से उसे कस्टोडियन के नाम करदी गई है। ये सब कैसे हुआ ये एक बड़ा सवाल है।

आपको बता दें कि 1949 में भारत का बंटवारा हुआ था और कुछ लोग पाकिस्तान चले गए थे। उनकी संपत्ति को सरकार ने निस्क्रांत मानकर उसे अपने कब्जे में ले लिया था। इस संपत्ति का कोई मालिक नहीं था। इसके बाद फिर 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्घ हुआ और इसमें भी कुछ लोग पाकिस्तान चले गए थे। इस संपत्त्ति को सरकार ने शत्रु संपत्ति मान लिया था। जिसकी देख रेख के लिए सरकार ले कस्टोडियन ऑफ इंडिया संगठन का गठन किया। यह कार्यालय मुंबई में है और निष्क्रांत व शत्रु संपत्ति का मालिक कस्टोडियन ऑफ इंडिया है। जबकि स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन इस जमीन की देख रेख करता है।

दादरी तहसीलदार राकेश जयंत ने कहा कि डीएम ने हमे आदेश दिया है कि जहाँ जहाँ सरकारी जमीनों पर कब्जा है वो पुलिस फोर्स की सायहता से कब्जा मुक्त कराई जाए। आज कुछ लोगो ने आकर रशीद अली पुत्र मुर्सलीन निवासी नूरपुर के खिलाफ शिकायत दी है इसकी शिकायत पहले भी आ चुकी है। समय समय पर सरकारी जमीन पर हुए कब्जे को अभियान चलाकर हटवाते रहते है। लेकिन बीते 3 महीनों से कोरोना महामारी में व्यस्त होने के चलते इस ओर ध्यान नही जा पाया है लेकिन अब समय मिला है बहुत जल्द हम कार्यवाही करेगें और जो लोग इसमे पीड़ित हुए है उनको न्याय मिलेगा।

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