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राशन डीलरों व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ राशन घोटाला

 Special Coverage News |  2018-09-07 08:25:08.0  |  नोएडा

राशन डीलरों व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ राशन घोटाला

धीरेन्द्र अवाना

नोएडा। उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर गरीबों का राशन डकारने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरह राष्ट्रीय खाघ सुरक्षा अधिनियम के तहत सरकार यह सुनिशिचत करती है कि सभी को खाघ सामग्री मिले लेकिन देखा जाए तो उसका प्रयास विफल होता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश के कई जिले इसकी चपेट में है लेकिन पाँच प्रमुख जिले जिनमें सबसे ज्यादा घोटाला हुआ है वो इस प्रकार है।सबसे पहला नम्बर इलाहाबाद दुसरा मेरठ,तीसरा मुजफ्फरनगर,चौथा गाजियाबाद और पॉचवां गौतमबुद्ध नगर का आता है।


अब हम आप को बताते है कि कैसे हुआ राशन घोटाला।राशन घोटाले के लिए सबसे पहले एनआईसी के डाटा बेस से छेड़छाड़ की गई उसके बाद ई-पॉश मशीन को हैक करके यह फर्जीवाड़ा किया गया।सरल भाषा में कहा जाये तो राशन डीलर गौदाम से राशन उठा कर अपनी दुकान में रख कर लेता है।उसके बाद से ही खेल शुरू होता है। राशन डीलर को करीब 90 प्रतिशत राशन कार्ड धारकों को वितरण करना होता है लेकिन डीलर कालाबाजरी करने के लिए करीब 40 से 50 प्रतिशत ही वितरण करता है।बचे हुये राशन को डीलर आपरेटर की मदद से वितरण के रिकार्ड में दिखा देता है जिसमें विभाग के अधिकारी की भी भूमिका महत्वपूर्ण होती है क्योंकि अधिकारी की आज्ञा के बिना कोइ भी व्यक्ति एनआईसी के डाटा बेस में छेडछाड़ नही कर सकता क्योंकि अधिकारी के पास ही इसका पासवर्ड होता है।इन तीन व्यक्ति की मिलीभगत से ही ये पूरा खेल खेला जाता है।


सूत्रों की माने तो इस खेल में 70 अधिकारी का व 30 प्रतिशत हिस्सा राशन डीलर का होता है जिसमें से डीलर आपरेट्रर को भी कुछ हिस्सा देता है।नोएडा में गरीबों का राशन हड़पने के इस खेल की साजिश गौतमबुद्धनगर के दो ऑपरेटरों ने राशन डीलरों के साथ मिलकर रची थी। रोहित व जीतू नामक दो ऑपरेटर इस पूरे खेल के मास्टर माइंड हैं। जांच में सामने आया है कि उन्होंने ही गाजियाबाद के राशन डीलर्स, अन्य ऑपरेटरों को साथ मिलाया और आधार कार्डों का फर्जीवाड़ा कर करोड़ों का घोटाला किया। गाजियाबाद में खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में गौतमबुद्धनगर के इन दोनों ऑपरेटरों रोहित और जीतू का नाम भी शामिल किया है।इस खेल में एक नाम और है वो है निशा जौशी का।निशा जौशी के खिलाफ आपूर्ति विभाग नोएडा में एफआईआर करा चुकी है लेकिन अभी तक उसकी गिरफ्तारी नही हो पायी है।


अब हम आपको बताते है कि निशा जौशी है कौन।निशा जौशी वो है जिसके आधार कार्ड से हजारो बार राशन लिया गया।निशा जौशी विवेक जौशी नामक एक राशन डीलर की बहन है जिसके खिलाफ कुछ महीने पहले नोएडा में एफआईआर हो चुकी थी।उसके बाद भी नोएडा में तैनात रहे एक अधिकारी ने इस डीलर को राशन कार्डो को एनआईसी के डाटा में चढ़ाने की जिम्मेवारी दी।उसके बाद डीलर ने अपनी बहन को भी इस गोरखधंधे में जोड़ लिया।क्या अधिकारी को ये नही पता था कि चोर के हाथ में तिजौरी की चाबी देने से चोरी होती ही है या फिर अधिकारी ने जान पूछ कर चोरी करवायी।इस प्रकरण में अब 20 एफआईआर नोएडा में व 11 दादरी में हुयी है।

आकांशा जतायी जा रही है कि कुछ कोइ डीलरों के खिलाफ एफआईआर हो सकती है।वही दुसरी ओर डीलर अपने बचाव में कहते है कि हमे 2 रूपये किलो वाला गेहू 3 रूपये किलो पड़ता है।अगर हमारा राशन बच जाता है तो अधिकारी जबरदस्ती राशन का स्टोक खत्म करने के लिए कहते है जब हम लोग गलत तरीके से राशन को वितरण करने से मना करते है तो अधिकारी कारवाई का दवाब बनाते है।

अधिकारियों के इस रवैये से परेशान होकर जिले के राशन डीलरों ने बेमियादी धरने पर बैठ गये।आदर्श कोटेदार एवं उपभोक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले राशन डीलरों ने मांग की है कि उनके खिलाफ एफआई आर वापस ली जाए।कोटेदारों को 25 हजार रूपये का मानदेय और अन्य प्रदेशों की तरह 200 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन दिया जाए।यदि मागे पूरी नही होती है तो 25 सिंतबर से दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करेगे।वही दुसरी तरह विभाग ने निलंबित दुकानों को पास की ही दुकानों के साथ अटैच कर दिया लेकिन डीलरों के धरने पर बैठने की वजह से कार्ड धारक राशन के लिए धक्के खा रहे है।अब देखते है कि विभाग इस समस्या से कैसे निपटता है।

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