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अयोध्या राम मंदिर: छठे दिन रामलला के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में रखे महत्व पूर्ण तथ्य

रामलला के वकील की तरफ से कहा गया कि मुस्लिम कानून के तहत किसी दूसरी जमीन पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती है।

 Sujeet Kumar Gupta |  14 Aug 2019 11:06 AM GMT  |  नई दिल्ली

अयोध्या राम मंदिर: छठे दिन रामलला के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में रखे महत्व पूर्ण तथ्य

नई दिल्ली। संविधान पीठ अयोध्या में विवादित 2.77 एकड़ भूमि तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला- के बीच बराबर बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर छह अगस्त से नियमित सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू यह मामले में दिन-प्रतिदिन की सुनवाई का आज छठा दिन था। रामलला की ओर से वरिष्ठ वकील के परासरन ने बहस की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि पूर्ण न्याय करना सुप्रीम कोर्ट के विशिष्ठ क्षेत्राधिकार में आता है।

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में छठे दिन सुनवाई शुरू हुई तो रामलला विराजमान की तरफ से सीएस. वैद्यनाथन अपनी दलीलें रखे, उन्होंने अदालत के सामने पुराणों का हवाला देना शुरू किया था। मंगलवार को राजीव धवन ने कहा था कि रामलला के वकील सिर्फ अदालत के फैसले को पढ़ रहे हैं, कोई तथ्य नहीं दे रहे हैं. जिसके बाद अब उन्होंने पुराणों का जिक्र करना शुरू किया है।

रामलला के वकील की तरफ से अदालत में स्कन्द पुराण का जिक्र किया गया है. उन्होंने इस दौरान सरयू नदी-राम जन्मभूमि के इतिहास और महत्व के बारे में बताया।

रामलला के वकील के द्वारा स्कन्द पुराण का जिक्र किए जाने पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आप जिन शब्दों का जिक्र कर रहे हैं, उनमें रामजन्मभूमि के दर्शन का जिक्र है. इसमें किसी देवता का जिक्र नहीं है. जिसपर वकील वैद्यनाथन ने कहा कि रामजन्मभूमि ही अपने आप में देवता है।

इस पर रामलला के वकील ने कहा कि मंदिर को किसने ढहाया इस पर कई तरह के तथ्य हैं, लेकिन ये तय है कि इसे 1786 से पहले गिराया गया था।

तभी जस्टिस बोबडे ने उनसे पूछा कि इस जगह को बाबरी मस्जिद कब से कहना शुरू किया गया? रामलला के वकील ने इसपर जवाब दिया कि 19वीं सदी में, उससे पहले के कोई साक्ष्य नहीं हैं. उन्होंने पूछा कि इसका क्या सबूत है कि बाबर ने ही मस्जिद बनाने का आदेश दिया था. क्या इसका कोई सबूत है कि मंदिर को बाबर या उसके जनरल के आदेश के बाद ही ढहाया गया था।

इस पर जस्टिस भूषण ने कहा कि इसी में 5 इंच के एक पालना का भी जिक्र है, क्या आप मानेंगे कि वह कोर्टयार्ड के अंदर है या बाहर? जिस पर वकील ने इसके अंदर होने की बात कही।

इस दौरान रामलला के वकील वैद्यनाथन ने जोसेफ टाइफेंथलर का हवाला देकर कुछ पढ़ा. जिसमें राम की याद में सरयू नदी के किनारे कुछ इमारतें बनाई गई हैं. जिसमें से एक स्वर्ग द्वार भी था. जो बाद में औरंगजेब के द्वारा गिराया गया, कुछ जगह जिक्र है कि बाबर के द्वारा गिराया गया।

इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा कि तभी हमारे यहां इसे इतिहास कहा गया है, जिसमें तारीख नहीं इवेंट का जिक्र है. बाद में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि तो आप हमें इस वक्त तारीख या फैक्ट दिखाने के लिए बल्कि लोगों की आस्था को दर्शाने के लिए सबूत पेश कर रहे हैं.

रामलला विराजमान के वकील वैद्यनाथन ने इस दौरान ब्रिटिश सर्वाईवर मार्टिन के स्केच का जिक्र किया, जिसमें 1838 के दौरान मंदिर के पिलर दिखाए गए थे. रिपोर्ट में दावा किया गया कि रामजन्मभूमि पर मंदिर ईसा मसीह के जन्म से 57 साल पहले मंदिर बना था. हिंदुओं का मानना है कि मुगलों के द्वारा मंदिर को तोड़ा गया. उन्होंने कहा कि यूरोप के इतिहास में तारीखों का जिक्र अहम है, लेकिन हमारे इतिहास में घटना महत्वपूर्ण है।

रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि अयोध्या शहर में जब बौद्ध का राज था, तभी से ही शहर का पतन शुरू हुआ. कई लोगों ने इस स्थान को खराब किया, हिंदुओं की मुख्य जगहों पर तीन मस्जिदें बनाई गईं. जिनमें से एक रामजन्मभूमि था. इस दौरान उन्होंने पुरातत्व विभाग की 1863, 1864, 1865 की रिपोर्ट भी पढ़ी. इसमें चीनी स्कॉलर फा हाइन के द्वारा राम की नगरी अयुता में आने का जिक्र है. राजा विक्रमादित्य ने अयोध्या में 368 मंदिर बनवाए, जिसमें रामजन्मभूमि पर बनाया गया मंदिर भी शामिल है.

लंच के बाद एक बार फिर कोर्ट की कार्यवाही

रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने अदालत में गुप्त वंश के दौरान देश में ब्राह्मण समाज प्रसारित हुआ तभी साकेत शहर का नाम अयोध्या रख दिया है।

इसपर उन्होंने कहा कि वहां ऐसा था, लेकिन हिंदू धर्म के लोगों को जन्मभूमि को लेकर विश्वास बरकरार रहा।

रामलला विराजमान की तरफ से वैद्यनाथन ने कहा कि जिस हिस्से पर हम हक की बात कर रहे हैं, उससे लोगों की आस्था जुड़ी है. इस दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ऐसा लगता है अयोध्या में बौद्ध, जैन, हिंदू और इस्लाम हर किसी का प्रभाव रहा है।

रामलला विराजमान के वकील वैद्यनाथ ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड ने 1945 में कहा था कि राम के जन्मस्थान पर मस्जिद बनाई गई थी. इस पर जस्टिस बोबडे ने सुन्नी वक्फ बोर्ड से सवाल पूछा, राजीव धवन ने इस पर जवाब दिया कि उन्होंने 1946 फैसले के खिलाफ सूट दायर किया था.

रामलला के वकील की तरफ से कहा गया कि मुस्लिम कानून के तहत किसी दूसरी जमीन पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती है. इसके अलावा उन्होंने जन्मभूमि स्थान के कुछ नक्शे भी अदालत के सामने रखे.

वैद्यनाथन ने कहा कि वहां कस्तूरी पिलर की मौजूदगी की बात कही, जिनमें फूल-शिव-विष्णु और कृष्ण की तस्वीरें थीं. उन्होंने दावा किया कि इन पिलर की जमीन पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती है।

इन तमाम तरह के तथ्य रखने के बाद के साथ ही बुधवार की बहस खत्म हो गई। अब इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी। क्योंकि गुरुवार को स्वतंत्रता दिवस के कारण कोर्ट बंद रहेगे।

आपको बता दें कि 6 अगस्त से अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई है। रोजाना सुनवाई के तहत हफ्ते में तीन दिन मंगल-बुध-गुरुवार को मामला सुना जाता है। लेकिन 8 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया कि वह हफ्ते में पांच दिन इस मामले को सुनेगा। अब हर हफ्ते सोमवार से शुक्रवार तक केस की सुनवाई अदालत में होगी। जिसको लेकर मुस्लिम पक्ष की तरफ से वकील राजीव धवन ने एक अपील की थी जिसमें उन्होंने हफ्ते में पांच दिन तक सुनवाई का विरोध किया था. राजीव धवन ने अदालत से कहा कि ये सिर्फ एक हफ्ते का मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय तक चलने वाला केस है. उन्होंने कहा कि हमें दिन-रात अनुवाद के कागज पढ़ने होते हैं और अन्य तैयारियां करनी पड़ती हैं।


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