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दूसरों की अच्छाई से प्रेरणा लेकर अपनी कमियों को सुधारते हुए कार्यों को मूर्तरूप देने में सहयोगी बनना ही महानता का लक्षण है: CM योगी

दूसरों की अच्छाई से प्रेरणा लेकर अपनी कमियों को सुधारते हुए कार्यों को मूर्तरूप देने में सहयोगी बनना ही महानता का लक्षण है: CM योगी
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CM योगी प्रयागराज के मेला क्षेत्र में आयोजित आदि शंकर विमान मण्डपम् के कुम्भाभिषेक कार्यक्रम के समापन अवसर पर पहुंचे

शशांक मिश्रा प्रयागराज

प्रयागराज : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रयागराज के मेला क्षेत्र में आयोजित आदि शंकर विमान मण्डपम् के कुम्भाभिषेक कार्यक्रम के समापन अवसर पर पहुंचे। मुख्यमंत्री सर्वप्रथम आदि शंकर विमान मण्डपम् मन्दिर गये। उन्होंने मन्दिर के सभी तलों पर जाकर वहां पर स्थापित विग्रहों के दर्शन करते हुए विमान मण्डपम् के ऊपरी तल पर पहुंचे। शंकर विमान मण्डपम में मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से कांची कामकोटि पीठाधीश्वर शंकराचार्य जी से वार्ता भी की।

जहां पर मेलाधिकारी विजय किरन आनन्द के द्वारा मुख्यमंत्री को कुम्भ मेला की जा रही तैयारियों की जानकारी देते हुए उन्हें मेला क्षेत्र के कार्यों को दिखाया गया। मुख्यमंत्री आदि शंकर विमान मण्डपम् मन्दिर होते हुए लेटे हुए हनुमान मन्दिर पहुंचे, जहां पर वे हनुमान जी के दर्शन के उपरान्त त्रिवेणी बांध के समीप स्थित आदि शंकर विमान मण्डपम् के कुम्भाभिषेक कार्यक्रम में पहुंचे। कुम्भाभिषेक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें अंग वस्त्र भेंट किया तथा प्रयागराज में पवित्र नदियों के संगम को दर्शाने वाला चित्र भी भेंट किया गया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रयागराज में आयोजित होने वाले कुम्भ से पहले इस तरह के आयोजन का किया जाना बहुत ही प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कुम्भाभिषेक के आयोजन करने वाले संतों एवं आयोजकों को बधाई दी। कुम्भ के पहले कुम्भाभिषेक आयोजन होना एक शुभ लक्षण है। कुम्भ भारत की सनातन पररम्परा तथा मानव कल्याण का एक सबसे बड़ा आध्यमिक एवं सांस्कृतिक परम्परा का आयोजन है। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन धर्म संस्कृति मनुष्य मात्र के लिए नहीं बल्कि इस चराचर जगत के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने की प्रेरणा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि किसी के कार्य पर उंगुली उठाना बहुत ही सरल होता है लेकिन कार्य में सहयोगी बनकर कार्य को मूर्तरूप में लाकर पूरा कराना यह महानता का लक्षण होता है।




कुम्भ भारत की महान परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। भारत की महान पीढी का उत्तरदायित्व बनता है कि हम सब कुम्भ के इस भव्य आयोजन को सम्पन्न करने के लिए उसी प्रकार की दिव्यता का परिचय दें। देश के अन्दर चार स्थानों पर यह पवित्र आयोजन सम्पन्न होता है जिसमें प्रयागराज का कुम्भ अपने आप में देश और दुनिया के लिए अलग ही कौतुहल एवं आकर्षण विषय बनता है।

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