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निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट ने दिया आदेश, सरकार अपलोड करे पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा दी गई ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट में आज जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनीष कुमार की पीठ द्वारा लखीमपुर के निघासन नगर पंचायत के आरक्षण के सम्बन्ध में दाखिल याचिका पर सुनवाई किया। अदालत ने प्रदेश सरकार को हुक्म जारी करते हुवे कहा है कि वह पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा ओबीसी आरक्षण को लेकर दी गई रिपोर्ट को अदालत में पेश करे।
इलाहबाद हाई कोर्ट की जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनीष कुमार की पीठ ने निघासन नगर पंचायत को आरक्षण के संबंध में 30 मार्च, 2023 को जारी सरकारी अधिसूचना को चुनौती देती हुई विकास अग्रवाल द्वारा दाखिल याचिका सुनवाई किया। याचिकाकर्ता का मामला यह है कि आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में नहीं है, जिससे उसके लिए अपनी आपत्तियां दर्ज करना असंभव हो गया है, इसलिए उन्होंने मामले में कुछ राहत की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया।
इस मामले में अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को शहरी स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रतिनिधित्व का अध्ययन करने के लिए उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा तैयार रिपोर्ट पेश करने का हुक्म दिया है। उल्लेखनीय है कि समुदाय के राजनीतिक पिछड़ेपन पर अनुभवजन्य डेटा एकत्र करने और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण के मुद्दे को देखने के लिए आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी थी।
गौरतलब है कि आयोग की रिपोर्ट पिछले महीने यूपी सरकार को सौंपी गई थी। इसके बाद, यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि रिपोर्ट को यूपी कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (27 मार्च) को उत्तर प्रदेश राज्य में ओबीसी कोटे के साथ स्थानीय निकायों के लिए दो दिनों के भीतर चुनाव प्रक्रिया की स्थापना के लिए अधिसूचना जारी करने की अनुमति दी थी।
इसने राज्य चुनाव आयोग को उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग की एक रिपोर्ट के संदर्भ में ओबीसी कोटा के साथ दो दिनों में इस संबंध में एक अधिसूचना जारी करने की अनुमति दी। इसके बाद, शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को 30 मार्च, 2023 को अधिसूचित किया गया, जिसमें स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों को भी अधिसूचित किया गया साथ ही 6 अप्रैल तक आपत्ति मांगी गई है।