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प्रयागराज की इन दो सीटों ने दिए है देश को कई प्रधानमंत्री,जानिए क्या है वर्तमान हालात!

 Special Coverage News |  28 March 2019 7:50 AM GMT  |  प्रयागराज

प्रयागराज की इन दो सीटों ने दिए है देश को कई प्रधानमंत्री,जानिए क्या है वर्तमान हालात!
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शशांक मिश्रा

हाल ही में मोदी सरकार ने कुंभ के सफल आयोजन से विरोधियों की बोलती बंद करने पर मजबूर कर दिया था। वर्षों बाद दिग्गजों को गंगा के पानी का आचमन करते देखा गया। अब लोकसभा चुनाव की तारीखें जैसे जैसे नजदीक आ रही है वैसे वैसे राजनीतिक समीकरण में बदलाव होता दिख रहा है!एक तरफ जहां कई पार्टियों ने उम्मीदवार की घोषणा अभी तक नही की है वही दूसरी तरफ बीजेपी ने इलाहाबाद लोकसभा सीट से प्रत्याशी की घोषणा करके सभी राजनैतिक दलों को चौका दिया है।

इलाहाबाद से (प्रयागराज )होने के बाद यह पहला लोकसभा चुनाव होने जा रहा है। जिसमे दिग्ज्जो की प्रतिष्ठा दांव पर है । कई दशक बाद नेहरू- गांधी परिवार सीधे तौर पर अपने पुरखों के शहर से चुनावी आगाज करके अपने को मजबूत करने की कोशिश की है।तो वही सुबे की सियासत का दिग्गज बहुगुणा पारिवार सीधे तौर पर इलाहाबाद से सियासी मैदान में है। जबकि योगी सरकार के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या सहित चार-चार भारी भरकम विभागों वाले मंत्रियों के लिए भी लोकसभा चुनाव की दोनों सीटें प्रतिष्ठा दांव पर है । बीते लोकसभा चुनाव में जिले की दोनों संसदीय सीटों इलाहाबाद और फूलपुर पर भारतीय जनता पार्टी ने अपना परचम लहराया था। लेकिन फूलपुर उपचुनाव में फूलपुर संसदीय सीट पर सपा का कब्जा हो गया है। वही सूबे में सपा बसपा गठबंधन के बाद इलाहाबाद लोकसभा सीट पर समीकरण बदले है।

2014 के लोकसभा चुनाव में जहां मोदी लहर से भाजपा ने एक तरफा माहौल बना दिया था। वहीं 2019 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव में कई सियासी सुरमाओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। नेहरु गांधी के पैतृक शहर होने और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के प्रयागराज से चुनावी आगाज करने के चलते जहां कांग्रेस के लिए जिले की दोनों सीटें नाक का सवाल बनी हुई हैं। वहीं सपा और बसपा गठबंधन के लिए भी इलाहाबाद संसदीय सीट जीतने के खास मायने हैं। जबकि प्रयागराज में विश्व स्तरीय कुंभ का आयोजन कर भाजपा को भी बड़ी उम्मीद है।

इलाहाबाद फूलपुर की लोकसभा सीट दिग्ज्जो की सीट रही है !कई प्रधानमंत्री दिए है इस सीट ने !फूलपुर लोकसभा भले ही पंडित नेहरु की सीट रही हो लेकिन इलाहाबाद सीट पर दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह,पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ मुरली मनोहर जोशी,, मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन, पूर्व सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा ,जनेश्वर मिश्र और सपा नेता रेवती रमण भी चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन इस सीट पर 2014 में श्यामाचरण गुप्ता ने लंबे समय बाद भाजपा को जीत दिलाई। डॉ मुरली मनोहर जोशी को हराकर लगातार दो बार इलाहाबाद संसदीय सीट पर सपा के रेवती रमण सिंह जीते थे।

इलाहाबाद लोकसभा सीट से भाजपा ने सबसे पहले अपना उम्मीदवार घोषित कर विरोधियों के समीकरण और कांग्रेस के मतदाताओ में सेध लगाने की बड़ी चाल चली है। इलाहाबाद लोकसभा सीट पर लंबे समय तक सियासी पुरोधाओं का कब्जा रहा लेकिन इस चुनाव में कोई दिग्गज मैदान में नही था । वही डॉ रीता बहुगुणा के नाम की घोषणा हुई जिसने यह तो तय कर दिया की सियासी जंग मजबूत होगी। भाजपा के भीतर खाने में माना जा रहा था की किसी बाहरी उम्मीदवार के नाम के एलान के बाद नाराज नेताओं की टीम सामने आएगी लेकिन बहुगुणा का नाम सामने आने पर भाजपा में कोई विरोध नही हुआ क्यों की न बाहरी होने का सवाल उठा और नही परिवारवाद की बात हुई। अब सपा- बसपा गठबंधन और कांग्रेस पर सबकी नजर है इनके उम्मीदवार के एलान के बाद यह तय होगा की लड़ाई कितनी दिलचस्प होगी।

2014 के सभी विरोधी अब एक साथ

2014 में सपा ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और मैदान में उतारा लेकिन भाजपा की लहर में कुंवर रेवती रमण सिंह को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के टिकट पर श्यामाचरण गुप्ता मैदान में उतरे और 313772 वोट पाकर सांसद चुने गए। जबकि सपा के रेवती रमण सिंह को 251763 वोट ही मिले। वहीं इसी सीट पर बसपा से केशरी देवी पटेल 162073 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रही। उस वक्त कांग्रेस के उम्मीदवार रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी को चौथे नंबर पर संतोष करना पड़ा था। लेकिन अब राजनीतिक परिस्थियां बदली है। उस समय के सभी विरोधी उम्मीदवार दिग्गज नेता अब भारतीय जनता पार्टी में है। भाजपा सांसद श्यामाचरण भी पार्टी छोड़ बांदा से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

वहीं जब हम मुद्दों की बात करते हैं तो

इलाहाबाद संसदीय सीट के मुद्दों की अगर बात करें तो औद्योगिक क्षेत्र नैनी बंदी के कगार पर है जो कि चुनाव में बड़ा मुद्दा होगा। यमुनापार इलाके में पेयजल संकट और सिंचाई का संकट भी सालों से बना हुआ है। औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से रोगजगार भी बड़ा मुद्दा होगा। यमुनापार को अलग जिला घोषित करने की भी मांग को राजनीति पार्टियां चुनावी मुद्दा बना सकती हैं। वही मेजा विधानसभा में सिरसा गाँव सहित और मदरा के गंगा तट पर पुल का निर्माण की मांग कई वर्षो से लगातार चल रही है। इलाहाबाद लोकसभा डॉ रीता बहुगुणा इलाहाबाद लोकसभा सीट पर दूसरी बार अपनी किश्मत आजमाने उतर रही है। हालाकि उन्हें जिले की पहली महिला महापौर बनने का गौरव हासिल हो चुका है।

जातीय समीकरण की अगर बात करें तो इलाहाबाद संसदीय सीट पर अनुमानित सवा लाख यादव, दो लाख मुस्लिम, दो लाख दस हजार कुर्मी दो लाख 35 हजार ब्राह्मण,पचास हजार ठाकुर,भूमिहार ढ़ाई लाख दलित एक लाख ,कोल डेढ़ लाख, वैश्य 80 हजार मौर्या और कुशवाहा चालीस हजार ,पाल एक लाख 25 हजार निषाद बिंद एक लाख विश्वकर्मा और प्रजापति व अन्य वोटर हैं। प्रयागराज की दोनों लोकसभा सीटों पर छठें चरण में 12 मई को मतदान होना है। मोदी सरकार की 5 वर्ष की उपलब्धि और जनता के बीच मोदी सरकार की नीतियों का प्रभाव उनके वोटों को प्रभावित कर पाता है या नही !

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