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काम करने वाले कुलपति हैं प्रो. हांगलूं,विश्वविद्यालय में कई बड़े बदलाव किए - जस्टिस अंशुमान सिंह

 Special Coverage News |  5 Jan 2019 5:08 AM GMT  |  इलाहाबाद

काम करने वाले कुलपति हैं प्रो. हांगलूं,विश्वविद्यालय में कई बड़े बदलाव किए -  जस्टिस अंशुमान सिंह
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शशांक मिश्रा

आज हिंदी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की तरफ से कुलपति प्रो रतनलाल हांगलूं के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर अभिनन्दन समारोह का आयोजन किया गया। इस अभिनंदन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर राजस्थान और गुजरात के पूर्व राज्यपाल रहे न्यायमूर्ति अंशुमान सिंह ने कहा कि 'कुलपति प्रो. रतनलाल काम करने वाले कुलपति हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में कई बड़े बदलाव किए हैं। कुलपति का विरोध भी हुआ पर वे काम में लगे रहे।न्यायमूर्ति अंशुमान सिंह ने कहा कि 'कुछ तो लोग कहेंगे, लोगो का काम है कहना , पर हमें रुकना नहीं चाहिए। इतने विवादों के बीच काम करने के कारण कुलपति की चमक और निखर गई है।


समारोह के आरंभ में हिंदी विभाग की अध्यक्षा प्रो. चंदा देवी ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। हिंदी विभाग के प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने कुलपति के जीवन संघर्षों के साथ उनके अकादमिक कार्यों का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि प्रो. हांगलू एक लोकतांत्रिक और जीवट छवि वाले व्यक्ति हैं और संकटों के बीच से रास्ता निकालना जानते है। उन्होंने कहा कि वो बेहतरीन अध्यापक और प्रशासक तो हैं ही साहित्यकार भी हैं।अपनी व्यस्तता के बीच वो हर जिम्मेदारी का कुशल निर्वाह करते हैं। अंग्रेजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष और निदेशक, एचआरडीसी प्रो. आर. के. सिंह ने कुलपति के रूप में प्रो. हांगलू के अनेक विशिष्टताओं का उल्लेख किया और बताया कि कैसे उनके आने के बाद विश्वविद्यालय में बंद पड़ी अकादमिक गतिविधियों को शुरू कराया गया। जिसमें सांस्कृतिक और अकादमिक प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियां तो थी ही भवनों का निर्माण भी शामिल है।



समारोह में प्रो. रतन लाल हांगलू ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग को धन्यवाद दिया और कहा कि वो इस मौके पर भावुक हो रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जैसी संस्था से प्रेम करना एक अर्थ में देश से प्रेम करना है। विश्वविद्यालय किसी एक व्यक्ति से नहीं सबके सम्मिलित प्रयासों से बनता है।विश्वविद्यालय के पुराने गौरव को लौटाने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र देश का नेतृत्व करें इसलिए उन्होंने कॉलेजों में पीजी और पीएच.डी. की व्यवस्था की।


डॉ. निरंजन सिंह ने प्रो. हांगलू के कामों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की शिक्षा को बचाना जरूरी है क्योंकि विदेशी विश्वविद्यालयों का दबाव बढ़ रहा है।उन्होंने एक नागरिक के तौर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रो. हांगलू के कामों का इलाहाबाद शहर पर कैसे परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ा इसको रेखांकित किया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग के वर्तमान और पूर्व अध्यापक, अन्य विभागों के अध्यक्ष और अध्यापक, डीन कला संकाय के साथ शोधार्थियों और छात्रों की व्यापक उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन विभाग के अध्यापक डॉ. लक्ष्मण गुप्ता और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. चितरंजन कुमार सिंह ने किया।

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