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सहारनपुर के एक कांग्रेस नेता ने सपा में संभावानाएं तलाशना शुरू किया

 Special Coverage News |  30 May 2019 2:40 AM GMT  |  सहारनपुर

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लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी

राज्य मुख्यालय लखनऊ। सियासत भी अजीबो-ग़रीब होती है इसमें कब कौन कहाँ चला जाए कुछ कहा नही जा सकता है कोई नेता मुकम्मल तौर पर किसी एक दल का नही होता और न ही कोई दल किसी नेता का मुकम्मल तौर पर होता है ये सौ फ़ीसदी सही है। ऐसी ही एक खबर सहारनपुर की सियासत को अपने इर्दगिर्द रखने का सपना संजोये रखने वाले परिवार से जुड़े एक सदस्य को लेकर आ रही है सूत्रों का कहना है कि गंगोह विधानसभा में मोदी की भाजपा के विधायक प्रदीप चौधरी कैराना लोकसभा सीट से सांसद बन गए है अब वहाँ उपचुनाव होगा उसी को ध्यान में रखते हुए इस परिवार का दिल भी मचलने लगा है कि क्यों न गठबंधन से विधायकी का उपचुनाव लड़ लिया जाए वैसे अगर देखा जाए तो इस परिवार का सियासत ही कारोबार है सही मायने में इस परिवार की रोज़ी रोटी सियासत से ही चलती है अपनी सियासी पकड़ का भय दिखाकर जनपद के अनेकों अनेक लोगों से पैसे ऐंठना इस परिवार के एक सदस्य का काम है कल तक सहारनपुर में कांग्रेस का झण्डा उठाने वाले इस परिवार के एक सदस्य ने समाजवादी पार्टी में अपने लोगों से बातचीत करनी शुरू कर दी है अब यह तो सपा का फिलहाल का नेतृत्व जो इस परिवार को माहत्व नही देता है वो लेगा या नही लेगा ये तो सपा का नेतृत्व जाने लेकिन इस परिवार ने अपने प्रयास शुरू कर दिए है।


क्योंकि उनको पता है कि कांग्रेस की गोद में रहने से फिलहाल कुछ हासिल होने वाला नही है इतिहास गवाह है कि यह परिवार टिकटों ब्लैक मेलिंग करता चला आ रहा है और इनकी सियासी भूख खतम होने का नाम ही नही लेती है हमारे सूत्रों का कहना है कि जनपद सहारनपुर की सियासत में बहुत जल्द बहुत बड़ा उलट फेर होने जा रहा है जिस तरीक़े से सहारनपुर की जनता ने लोकसभा चुनाव में गठबंधन के पक्ष में मतदान किया उससे बहुत लोग अपना सियासी घर बदलने को मजबूर हो रहे है।


सहारनपुर जनपद में गंगोह सीट पर होने वाला उपचुनाव भी एक कारण है गंगोह विधानसभा सीट पर 369367 वोट है यहाँ 2017 के आम विधानसभा चुनाव में मोदी की भाजपा से प्रदीप चौधरी चुनाव जीते थे जिनको 99446 वोट मिले थे जो अब कैराना लोकसभा सीट से सांसद बन गए है बसपा व सपा और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़े थे हालाँकि कांग्रेस और सपा का विधानसभा चुनाव 2017 में गठबंधन भी था और गंगोह सीट कांग्रेस के खाते में गई थी इसके बावजूद सपा प्रत्याशी चौधरी इंद्रसेन भी चुनाव लड़े थे कांग्रेस के नोमान मसूद को 61418 वोट मिले थे वही सपा के चौधरी इंद्रसेन को 47219 वोट मिले थे और बसपा के चौधरी महीपाल माजरा को 44717 वोट मिले थे जबकि अभी फिलहाल हुए लोकसभा चुनाव में गठबंधन की प्रत्याशी रही तबस्सुम हसन चौधरी को गंगोह विधानसभा सीट पर तीस हज़ार से हार का सामना करना पड़ा इस पर लोगों का तर्क है कि लोकसभा चुनाव में और विधानसभा के चुनाव में लोगों का सोचने का नज़रिया बदल जाता है और कुछ का कहना ये भी है कि गठबंधन के नेताओं ने भी मोदी की भाजपा कैराना लोकसभा सीट जीते ऐसा प्रयास किया है ताकि उपचुनाव लड़ने का अवसर मिल सके जैसा कि सपा के ज़िला अध्यक्ष चौधरी रूद्रसेन के परिवार का ये भरपूर प्रयास रहा कि प्रदीप चौधरी सांसद बन जाए ताकि हम विधानसभा का उपचुनाव लड़ सके और लोगों का कहना है कि ये परिवार अपने प्रयास में सफल भी रहा अब देखना है कि गंगोह विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में गठबंधन का स्वरूप क्या होगा क्या कांग्रेस भी अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी जिसकी संभावना बहुत कम है क्या वह गठबंधन के प्रत्याशी का समर्थन करेगी ये बात आने वाले दिनों में साफ हो पाएगी।

अब तो सिर्फ़ सहारनपुर की सियासत की नई बिसात बिछाई जा रही है देखते कौन नेता कहाँ जाने के जुगाड़ भिड़ाते है यही देखने वाली बात है।सपा जिला अध्यक्ष चौधरी रूद्रसेन के मोदी की भाजपा में जाने के पूरे चांस लग रहे है क्योंकि उनके जाने की तैयारी दौराने लोकसभा चुनाव ही हो चुकी थी इस खिचड़ी को पकाने में सपा से ही एमएलसी रहे अब मोदी की भाजपा में जा चुके गुर्जर नेता चौधरी वीरेन्द्र सिंह के द्वारा तैयार की गई है जिसकी भनक दौराने चुनाव कैराना से गठबंधन प्रत्याशी रही तबस्सुम हसन व उनके पुत्र विधायक नाहिद हसन को हो गई थी और इस बात को लेकर हसन परिवार और रूद्रसेन के बीच बहस भी हुई थी कि विधायक बनने का सपना पूरा नही होने दूँगा।

देखते है कि गंगोह उपचुनाव में उँट किस करवट बैठता है क्या विपक्ष की स्ट्रेटेजी कामयाब होती है या सहारनपुर की सियासत के सौदागर बाज़ी अपनी और मोड़ने में कामयाब होते है जिसके चांस बहुत कम बताए जा रहे है क्योंकि इस परिवार की छवि मोदी की भाजपा की बी टीम की बन गई है कि इनका मक़सद जितना नही बल्कि मोदी की भाजपा को फ़ायदा पहुँचाना है।

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