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संबंध बनाने से इनकार करने पर पीड़िता के कपड़े फाड़ देता था चिन्मयानंद, सरकारी वकील का बड़ा खुलासा

एसआईटी ने यह भी कहा कि भाजपा नेता के आश्रम के सुरक्षा गार्ड सहित चार लोगों ने इस बात की पुष्टि की है कि पीड़ित छात्रा अक्सर 'दिव्य धाम' आया करती थी.

 Special Coverage News |  2 Oct 2019 6:16 AM GMT  |  शाहजहांपुर

संबंध बनाने से इनकार करने पर पीड़िता के कपड़े फाड़ देता था चिन्मयानंद, सरकारी वकील का बड़ा खुलासा

शाहजहांपुर. लॉ कॉलेज की छात्रा से रेप और यौन शोषण (Rape Case) मामले में नई कहानी सामने आई है. सरकारी वकील अनुज सिंह ने खुलासा करते हुए दावा किया है कि जब भी पीड़िता पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद (Chinmayanand) के साथ संबंध बनाने से इनकार करती थी तो वो उसके कपड़े फाड़ देता था. वकील अनुज सिंह (Anuj Singh) ने कहा कि युवती के इस बयान के आधार पर पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 डी के तहत मामला दर्ज किया गया था.

खबर के मुताबिक, सोमवार को आरोपी चिन्मयानंद की जमानत याचिका पर जिला कोर्ट में सुनवाई हुई थी. इस दौरान एसआईटी ने यह भी कहा कि बीजेपी नेता के आश्रम के सुरक्षागार्ड सहित चार लोगों ने इस बात की पुष्टि की है कि पीड़ित छात्रा अक्सर 'दिव्य धाम' आया करती थी. पीड़िता के अनुसार, चिन्मयानंद के आश्रम के एक कमरे के अंदर उसके साथ कई बार बलात्कार किया गया. इसी कमरे में चिन्मयानंद का मालिश करते हुए वीडियो भी शूट किया गया था.

चिन्मयानंद ने कई बार रेप किया

बताते चलें कि दिल्ली पुलिस के द्वारा एसआईटी को दी गई शिकायत और 161 और 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान में भी पीड़ित छात्रा ने कहा है कि चिन्मयानंद ने उसके साथ कई बार रेप किया, और जब भी उसने इसका विरोध किया तो उसके कपड़े फाड़ दिए गए.

जबरन वसूली मामले में एक आरोपी है

वकील अनुज सिंह ने कहा कि पीड़िता के आरोपों को मजबूत बनाने के लिए कई सबूत हैं, जो दिव्य धाम स्थित कॉलेज और लैब से जुटाए गए हैं. वकील ने आगे कहा कि ऐसे में हमने शिकायतकर्ता की जमानत याचिका पर भी आपत्ति जताई है, जो जबरन वसूली मामले में एक आरोपी है. दोनों ही मामलों में, दोनों पक्षों के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक सबूत थे जो कि फोरेंसिक लैब (एफएसएल) द्वारा सत्यापित किए गए थे. इस बीच, एसआईटी के एक अधिकारी ने कहा कि जांच निष्पक्ष थी और हर उस व्यक्ति को आरोपी बनाया गया, जिसके खिलाफ प्रत्यक्ष सबूत मिले हैं. यही वजह है कि एसआईटी ने पीड़िता के खिलाफ आईपीसी की धारा 385 के तहत मामला दर्ज किया.

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