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ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग से हैरानी जताने वालों को उत्तराखंड में लगी आग पर सहानुभूति क्यों नहीं?

वहीं, तेज धूप के चलते जंगल में घास और लकड़ियां सूखी हुई हैं, जिससे आग काफी तेजी से फैल रही है।

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग से हैरानी जताने वालों को उत्तराखंड में लगी आग पर सहानुभूति क्यों नहीं?
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उत्तराखंड के जंगलों में भड़की भीषण आग, न मीडिया को खबर न सरकार को चिंता.. ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग से हैरानी जताने वालों को उत्तराखंड में लगी आग पर सहानुभूति क्यों नहीं, चार दिनों से राज्य में भड़की आग हजारों एकड़ में फैले जंगल को खाक कर चुकी है लेकिन अब तक नहीं बना राष्ट्रीय मुद्दा।

उत्तराखंड के पौड़ी-गढ़वाल जिले के श्रीनगर इलाके में स्थित जंगलों में शनिवार को भीषण आग गई है। तेज गर्मी और धूप के कारण उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के जंगलों में आग लग जाती है। तेज हवा के कारण आग काफी तेजी से फैल रही है। वहीं, तेज धूप के चलते जंगल में घास और लकड़ियां सूखी हुई हैं, जिससे आग काफी तेजी से फैल रही है।

तेज हवा के कारण आग काफी तेजी से फैल रही है। वहीं, तेज धूप के चलते जंगल में घास और लकड़ियां सूखी हुई हैं, जिससे आग काफी तेजी से फैल रही है। स्थानीय वन अधिकारी अनीता कुंवर ने बताया, '5-6 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है और जलकर राख हो गया है। तेज हवा के कारण आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। आग बुझाने के लिए अभी और टीमें बुलाई जा रही हैं।'

पिछले साल जल गया 2104 हेक्टेयर जंगल

फिलहाल आग के कारणों के बारे में नहीं पता चल सकता है। आमतौर पर गर्मी के दिनों में पहाड़ी इलाकों का सूखे पत्तों और घासफूस में आग लग जाती है, जो देखते ही देखते बड़े-बड़े जंगलों को खाक में मिलाकर रख देती है। पिछले साल ऐसी ही एक आग लगी थी, जिसमें उत्तराखंड के दो हजार हेक्टेयर से ज्यादा जंगल राख में मिल गया था।

यह आग 2016 की याद दिलाती है। 2016 में 4,538.21 हेक्‍टेयर जंगल आग से जल चुका था। जंगल में लगी आग की तबाही कोई नई बात नहीं है। सन 2000 में जब से उत्‍तराखंड बना है 44,518 हेक्‍टेयर जंगल आग में झुलस चुका है। इसके बावजूद आग बुझाने के उपाय नाकाफी साबित हुए हैं।


Shiv Kumar Mishra
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