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भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ राजभवन में मुलाकात कीये

 Sujeet Kumar Gupta |  10 Aug 2019 11:08 AM GMT  |  नई दिल्ली

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ राजभवन में मुलाकात कीये
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पश्चिम बंगाल । पश्चिम बंगाल के राज्य के राज्यपाल जगदीप धनकर से भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने आज कोलकाता के राजभवन में मुलाकात की। अभी पिछले दिनों यानि 9 अगस्त को पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी राजभवन में जा कर मुलाकात की थी। राजभवन से रवाना होते समय ममता ने पत्रकारों से कहा कि, ''यह एक शिष्टाचार भेंट थी।'' मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच यह पहली मुलाकात थी और इस दौरान राज्यपाल की पत्नी सुदेश धनकर भी वहां मौजूद थीं।

सुनील अरोड़ा ने शुक्रवार यानि 9 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की जगह मतपत्रों से मतदान कराने की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मांग को ठुकरा दिया था। और कहा कि पुरानी प्रणाली पर लौटने का कोई सवाल नहीं उठता। अरोड़ा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने मतपत्रों से मतदान फिर शुरू करने के खिलाफ कई बार फैसले दिये हैं।

बतादें कि धनकर ने 30 जुलाई को पश्चिम बंगाल के 28वें राज्यपाल के तौर पर शपथ ली है। उनसे पहले केशरीनाथ त्रिपाठी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। राजभवन में आयोजित शपथ समारोह में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टीबीएन राधाकृष्णन ने धनखड़ को शपथ दिलाई।

जानिए जगदीप धनखड़ कौन है

जगदीप धनखड़ सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं इसके अलावा वह राजस्थान के झुंझुंनूं से लोकसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं। वर्ष 1989 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने झुंझुंनूं से अपना प्रत्याशी उतारने की बजाय गठबंधन के तहत जनता दल प्रत्याशी जगदीप धनखड़ का समर्थन किया था। लेकिन जब 1991 में हुए लोकसभा चुनावों में जनता दल ने जगदीप धनखड़ का टिकट काट दिया तो वह पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गये और अजमेर से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें वहां हार का मुँह देखना पड़ा। धनखड़ किशनगढ़ क्षेत्र से राजस्थान विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। जाटों को ओबीसी दर्जा दिलाने के लिए धनखड़ ने काफी प्रयास किये। वह विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी जुड़े रहे हैं। पश्चिम बंगाल में उनके सामने कानून का शासन बनाये रखने की बड़ी चुनौती होगी क्योंकि यही वह राज्य है जहां देश में सर्वाधिक राजनीतिक हिंसा होती है।

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