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पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने नये राज्यपाल जगदीप धनखड़ से की मुलाकात

मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच यह पहली मुलाकात थी और इस दौरान राज्यपाल की पत्नी सुदेश धनकर भी वहां मौजूद थीं।

 Sujeet Kumar Gupta |  9 Aug 2019 12:26 PM GMT  |  नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने नये राज्यपाल जगदीप धनखड़ से की मुलाकात
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पश्चिम बंगाल । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को राज्य के राज्यपाल जगदीप धनकर से यहां उनके आधिकारिक निवास राजभवन में मुलाकात की। राजभवन के सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि बनर्जी दोपहर करीब साढ़े 12 बजे राजभवन पहुंची थी। राजभवन से रवाना होते समय ममता ने पत्रकारों से कहा कि, ''यह एक शिष्टाचार भेंट थी।'' मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच यह पहली मुलाकात थी और इस दौरान राज्यपाल की पत्नी सुदेश धनकर भी वहां मौजूद थीं।

बतादें कि धनकर ने 30 जुलाई को पश्चिम बंगाल के 28वें राज्यपाल के तौर पर शपथ ली है। उनसे पहले केशरीनाथ त्रिपाठी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। राजभवन में आयोजित शपथ समारोह में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टीबीएन राधाकृष्णन ने धनखड़ को शपथ दिलाई। समारोह में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अलावा, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व वरिष्ठ कांग्र्रेस नेता अब्दुल मन्नान व अन्य वरिष्ठ जन उपस्थित थे। शपथ समारोह के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों के साथ परिचय कराया। नवनियुक्त राज्यपाल ने सभी उपस्थित विशिष्ठजनों के साथ गर्मजोशी से हाथ मिलाया व अभिवादन स्वीकार किया।

जानिए जगदीप धनखड़ कौन है

जगदीप धनखड़ सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं इसके अलावा वह राजस्थान के झुंझुंनूं से लोकसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं। वर्ष 1989 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने झुंझुंनूं से अपना प्रत्याशी उतारने की बजाय गठबंधन के तहत जनता दल प्रत्याशी जगदीप धनखड़ का समर्थन किया था। लेकिन जब 1991 में हुए लोकसभा चुनावों में जनता दल ने जगदीप धनखड़ का टिकट काट दिया तो वह पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गये और अजमेर से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें वहां हार का मुँह देखना पड़ा। धनखड़ किशनगढ़ क्षेत्र से राजस्थान विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। जाटों को ओबीसी दर्जा दिलाने के लिए धनखड़ ने काफी प्रयास किये। वह विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी जुड़े रहे हैं। पश्चिम बंगाल में उनके सामने कानून का शासन बनाये रखने की बड़ी चुनौती होगी क्योंकि यही वह राज्य है जहां देश में सर्वाधिक राजनीतिक हिंसा होती है।

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