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दिल्ली विधानसभा चुनाव: त्रिकोणीय मुकाबले में लोअर मिडिल पर फंसा पेंच

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन होगा इसकी घोषणा न तो बीजेपी ने की है न ही कांग्रेस ने.

 Sujeet Kumar Gupta |  7 Jan 2020 6:06 AM GMT  |  नई दिल्ली

दिल्ली विधानसभा चुनाव: त्रिकोणीय मुकाबले में लोअर मिडिल पर फंसा पेंच

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 की तारीखों का ऐलान कर दिया. राजधानी में 8 फरवरी को मतदान होगा जिसके बाद 11 फरवरी को वोटों की गिनती होगी. वर्तमान में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सरकार है जिसका कुल 70 विधानसभा सीटों में से 67 पर कब्जा है. सिर्फ 3 सीट भाजपा के पास हैं जबकि अजय माकन की कांग्रेस के हाथ बिल्कुल खाली हैं. ऐसे में इस बार यहां भाजपा कांग्रेस और आप का त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है।

बतादें कि इस बार त्रिकोणीय इस वजह से हुआ है कि भाजपा मोदी के सहारे नैया पार करने के जुगत में है तो कांग्रेस और आप मतदाताओं को फ्रि का ऑफर में लुभाने में लगे है। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में एक सर्वे किया गया था। जानिए क्या कहता है रिपोर्ट

सर्वे एजेंसी सीएसडीएस- लोकनीति ने पिछले चुनाव बाद सर्वे किया था कि आखिर किस तबके ने किसे वोट दिया. सर्वे में पता चला कि दिल्ली में रहने वाले गरीब तबके में से 66 फीसदी वोट आप को गया, 22 फीसदी बीजेपी को और महज 9 फीसदी कांग्रेस को वोट मिले. इसके बाद लोअर मिडिल क्लॉस की बारी आती है जिसमें 57 फीसदी लोगों ने आप को वोट किया जबकि 29 फीसदी ने बीजेपी को और 10 फीसदी ने कांग्रेस को वोट किया था.

दिल्ली में रहने वाली बड़ी आबादी मिडिल क्लॉस की है और सर्वे का रिजल्ट बताता है कि मिडिल क्लॉस में से 51 फीसदी ने आप को वोट किया, 35 फीसदी ने बीजेपी को और महज 13 फीसदी ने कांग्रेस को वोट डाला था. सर्वे के मुताबिक राजधानी में रहने वाले अपर क्लॉस में से 47 फीसदी ने आप सरकार के लिए वोट दिया जबकि 43 फीसदी अमीर तबके ने बीजेपी और 6 फीसदी लोगों ने कांग्रेस का समर्थन किया.

आर्थिक आधार पर बांटे गए इस सर्वे से एक बात जो साफ तौर पर नजर आती है वो ये कि गरीब, मिडिल क्लॉस और लोअर मिडिल क्लॉस ने आप का साथ दिया जबकि अपर क्लॉस ने बीजेपी और आप को लगभग बराबर वोट दिए. बीजेपी और कांग्रेस के लिए इस बार लोअर और मिडिल क्लॉस के वोट को अपने पक्ष में लाने की बड़ी चुनौती होगी. खास तौर पर तब जब दिल्ली सरकार ने दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जबर्रदस्त काम किया है जिसका सबसे ज्यादा फायदा गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को ही हो रहा है. इसके अलावा आप सरकार में गरीब और लोअर मिडिल क्लॉस का बिजली और पानी का बिल लगभग खत्म हो चुका है।

इस बार दिल्ली विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन होगा इसकी घोषणा न तो बीजेपी ने की है न ही कांग्रेस ने. हालांकि दिल्ली चुनावों से कुछ दिनों पहले ही अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का फैसला करने वाली बीजेपी इसे वोट में तब्दील करना चाह रही है. यह तो चुनाव नतीजे ही बताएंगे कि इस कदम का बीजेपी को कितना फायदा हुआ. हालांकि आम आदमी पार्टी भी इसका श्रेय ले रही है.

बीजेपी के लिए तो स्थिति और भी मुश्किल नजर आती है. केंद्र में लगातार दूसरी बार सरकार बनाने वाली बीजेपी के पास दिल्ली में कोई सीएम पद का चेहरा नहीं है. ऊपर से एनआरसी और सीएबी ने बीजेपी की हालत एक तो कोढ़ ऊपर से खुजली जैसी कर दी है. बहरहाल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पार्टी में चुनाव स्पेशलिस्ट माना जाता है. देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी दिल्ली फतह के लिए कौन सा फॉर्मूला निकालकर लाती है.

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