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पति-पत्नी, बच्चे और बॉस – कैसे पूरा करें सबकी उम्मीदों को?

अगर लोगों की आपसे उम्मीदें, आपको परेशान कर रही हैं तो इन चीजों को एक अलग नजरिए से देखने का समय आ गया है। ये अपेक्षाएँ(उम्मीदें) हमारे लिए, अपनी सीमाओं से परे जा कर, जीवन के लिए कुछ करने का अवसर हो सकती हैं।

 Alok Mishra |  2018-09-04 09:10:39.0  |  नई दिल्ली

पति-पत्नी, बच्चे और बॉस – कैसे पूरा करें सबकी उम्मीदों को?

लोग आपसे कई तरह की अपेक्षाएं रखते हैं और ये अपेक्षाएँ एक-दूसरे के खिलाफ हैं। पत्नी चाहती है कि आप शाम साढ़े पाँच बजे तक घर आ जाएँ, उधर बॉस चाहता है कि आप साढ़े सात तक ऑफ़िस में काम करें। आपके पास केवल चौबीस घंटे हैं, लेकिन आपको अपने माता-पिता, अपने बच्चों, अपने बॉस और अपने पति या पत्नी की उम्मीदें पूरी करनी है, तो आपको यह सब करने के लिए दिन में साठ घंटे का समय चाहिए। सवाल है कि 'मैं इतना एक्स्ट्रा टाइम कहाँ से लाऊँ?' यही सबसे बड़ा प्रश्न है।

लोगों की आपसे उम्मीदें होना एक वरदान है

इस समय, लोग आपसे आपकी क्षमता से अधिक उम्मीदें लगाए हुए हैं। इस बात को कोसे नहीं। लोग आपसे बड़ी उम्मीदें रखते हैं, यह तो आपके लिए एक वरदान है। अगर लोग आपको देख कर सोचते, 'ओह इससे कोई उम्मीद नहीं रख सकते',या उन्हें वाक़ई आपसे कोई उम्मीद न हो तो क्या आपको लगता है कि यह आपके लिए अच्छा होगा? अगर आपके बॉस को आपसे कोई उम्मीद नहीं रह जाए तो आपको काम से निकाला भी जा सकता है। वे सब आपसे बहुत सारे कामों की उम्मीद कर रहे हैं। यह आपके लिए एक अवसर है कि आप अपनी सीमाओं से परे जा कर, जीवन में कुछ करें। क्या यह कहने मतलब है कि आप सबकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए कुछ ख़ास करेंगे? ऐसा कभी नहीं होगा, लेकिन यदि वे लगातार आपसे कोई न कोई उम्मीद रखे हुए हैं तो इसका मतलब है कि आपका जीवन सही ढर्रे पर चल रहा है। अपनी खुशहाली का आनंद लें, इस बारे में शिकायत न करें। बस अपनी ओर से जो सबसे अच्छा हो सके, वो करते चलें।

यह आपके कामों को पर्फ़ेक्ट बनाने की बात नहीं है। जीवन में पर्फ़ेक्शन जैसी कोई चीज नहीं होती। केवल एक चीज ही पूरी तरह से पर्फ़ेक्ट है, जिसे हम मृत्यु कहते हैं। यदि आप पर्फ़ेक्शन चाहते हैं तो अचेतन रूप से आप अपने लिए मृत्यु चाह रहे हैं। जीवन में पर्फ़ेक्शन की चाह न करें। जीवन इसलिए सुंदर नहीं बनता कि आप पर्फ़ेक्ट हैं। यह तब सुंदर बनता है जब आप अपने हर काम को मन लगा कर करते हैं। जीवन कभी पर्फ़ेक्ट नहीं हो सकता क्योंकि आप जिस भी तरह से काम को अभी कर रहे हैं, आप इसे और बेहतर तरीके से कर सकते थे। तो पर्फ़ेक्शन का सवाल ही पैदा नहीं होता। जब आपके लिए बड़ी उम्मीदें होंगी, तभी आप अपनी सीमाओं का विस्तार कर सकेंगे। अगर आप अभी और विस्तार कर सकते हैं इसका मतलब है अभी आप अपनी सीमा तक नहीं पहुँचे। अगर कोई अपेक्षा न हुई तो आपको अपनी पूरी संभावना का कभी पता नहीं चलेगा।

आप हालात को उस हद तक संभालें, जिस हद तक आप संभाल सकते हैं

किसी की उम्मीद के बिना, ख़ुद को परम सीमा तक ले जाने के लिए अलग तरह की सजगता और चेतना की आवश्यकता होती है। इसके लिए आपके भीतर ऐसी क्षमता होनी चाहिए। इस समय आप ऐसे नहीं हैं। आप इस समय लोगों की उम्मीदों के हिसाब से ही चलना जानते हैं। उन्हें आपसे बड़ी से बड़ी उम्मीद रखने दें। आप जिस हद तक हालात को संभाल सकते हैं, उसे संभालें। हो सकता है कि कुछ बातें बस से बाहर रहें। आप जितना ज्यादा काम करेंगे, भूलें भी उसके अनुसार ही होंगी पर बहुत कुछ सही भी तो होगा।

आपके जीवन की गुणवत्ता क्या है, या आप कितने सफल हैं, उसका अंदाजा इस बात से नहीं लगता कि आपने कोई लक्ष्य हासिल किया है या नहीं। इसे इस चीज से जोड़ा जाना चाहिए कि आप ख़ुद को अपने कामों में झोंक रहे हैं, या नहीं। जो भी होना है, वह आपकी क्षमता, परिस्थिति, और कई चीज़ों के एक साथ जुड़ने के तरीके पर निर्भर करेगा - इसमें बहुत सी बातें शामिल हैं। परंतु आप जीवन में जिसे महत्व देते हैं, क्या उसे अपना सौ प्रतिशत दे रहे हैं? यही सबसे बड़ा सवाल है।

आप काम पर जाते हैं, आपको घर संभालना है - यह सर्वाइवल(जीवन यापन) है, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। आपने कोई बहुत महत्वपूर्ण काम नहीं किया। इसे करने में बहुत कोशिश नहीं करना पड़ती, लेकिन अधिकतर लोगों ने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा काम बना लिया है। उनके जीवन का मक़सद यही है कि कैसे कमाएँ और जीवित रहें। ऐसा होना जरुरी नहीं है। एक इंसान इससे कहीं अधिक क्षमतावान(काबिल) है। अगर इस क्षमता का विस्तार करना है, तो आपको अपने मन से कचरा हटाना होगा। अपने भीतर काम करने के लिए आपके पास कुछ आसान उपाय और अभ्यास मौजूद हैं। अगर आप कुछ समय के लिए इनके साथ काम करेंगे तो आप देखेंगे कि आपके दिमाग में हर चीज स्पष्ट रूप से सामने आने लगी है क्योंकि यह आपकी क्षमता से परे नहीं है। यह कुछ ऐसा है जिसे आपको अपने लिए करना ही चाहिए।

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