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मारे जा रहे पीटे जा रहे कोसे जा रहे दुत्कारे जा रहे निर्दोष ब्राह्मण, पुजारी और संत आखिर किससे न्याय मांगे

 Shiv Kumar Mishra |  10 Oct 2020 10:27 AM GMT  |  दिल्ली

मारे जा रहे पीटे जा रहे कोसे जा रहे दुत्कारे जा रहे निर्दोष ब्राह्मण, पुजारी और संत आखिर किससे न्याय मांगे
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लगातार हो रही हत्याओं के पीछे के षड्यंत्र को सामने लाने के लिए सीबीआई की जांच हो आखिर क्या कारण है.पांच छह महीनों से लगातार एक पर एक घटनाएं पूरे देश भर में घट रही है विशेष रूप से इन घटनाओं में 1 जाति वर्ग के लोगों को निर्मम रूप से क्रूरता पूर्वक मारा जा रहा है दुर्भाग्य यह है कि वह वर्ग राष्ट्रभक्त है और जातिवादी नहीं है और ना हीजाति के नाम पर कभी फसाद करता है ना किसी को पीटता है ना बसों को तोड़ता है और ना ही कोई अराजक स्थिति देश में पैदा करता है.

राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए सत्ता की प्राप्ति के लिए इस वर्ग को पिछले लंबे समय से कोसा जाता है उस पर लांछन लगाए जाते हैं उस पर आरोप लगाए जाते हैं पर वह सहनशील धैर्य पूर्वक इन सब आरोपों पर कोई जवाब नहीं देता और ना ही कोई प्रतिक्रिया करता है ऐसा भी नहीं है किस जाति वर्ग से राजनीतिक प्रतिनिधि ना हो और ऐसा भी नहीं है कि उनमें बोलने की क्षमता ना हो परंतु पता नहीं क्यों इस जाति वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधि जब विधानसभाओं में लोकसभा में राज्यसभा में विधान परिषदों में पहुंच जाते हैं तो अपने ही वर्ग पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध अपने ही वर्ग के ऊपर हो रहे अन्याय के विरुद्ध मौन रह जाते हैं जिन जिन पार्टियों में यह लोग हैं अपनी पार्टी की विचारधारा और पार्टी लाइन के विपरीत कोई बात नहीं रखते हैं क्या करण है पता नहीं मैं इन्हें कायर भी नहीं कह सकता इन्हें मुंह भी नहीं कह सकता और इनमें हौसला या सांस नहीं यह भी नहीं कह सकता पता नहीं क्या मजबूरी है कि जब अपने ही वर्ग पर अत्याचार होता है तो मीडिया में बैठे इस जाति के लोग मुंह में दही जमा लेते हैं.

समाचार पत्रों में जिनके हाथ में कलम है उनकी कलम की स्याही सूख जाती है समाजिक संस्थाओं के शीर्ष पर राजनीतिक संस्थाओं के शीर्ष पर प्रशासनिक संस्थाओं के शीर्ष पर अथवा इन संस्थाओं में कार्य कर रहे लोगों को जैसे कोई मतलब ही नहीं कि हम जिस जाति समाज से पैदा हुए उसके प्रति भी हमारी कोई जिम्मेदारी है ब्राह्मण कभी जातिवादी नहीं होता मैं भी जातिवादी नहीं हूं परंतु मेरा स्पष्ट मत है कि जो पुत्र अपने मां के लिए अपनी मां की पीड़ा के लिए अपनी मां के दुख दर्द को दूर करने के लिए कोई साधन नहीं करता कोई प्रयास नहीं करता वह कुपुत्र होता है जिस जाति समाज राष्ट्र में हम पैदा होते हैं उसकी समस्याओं को समाधान करने के लिए हमें प्रयास करना चाहिए उस जाति समाज राष्ट्र पर यदि कोई अत्याचार अनाचार होता है तो उसके विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए यही सुपुत्र का लक्षण है एक-एक जिले में दर्जनों जातिगत अध्यक्ष पग लिए बैठे हैं एक-एक जिले में अनेक सामाजिक संस्थाओं में इस समाज के लोग उचित स्थान पर कार्य कर रहे हैं आखिर वह किसलिए अपने ही समाज पर अपनी ही जाति पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध आवाज नहीं उठा रहे और और झूठे अनर्गल ऐसे आरोप इस जाति पर लगाए जाते हैं जिन्हें सुनकर क्रोध नहीं बल्कि हंसी आती है परंतु कोई उत्तर नहीं देते मुझे पीड़ा है.

हम कभी जातिवादी नहीं रहे यदि किसी भी जाति पर जाति को लेकर उसके साथ अत्याचार अनाचार होता है तो बहुत दुख होता है किसी समाज पर उसके समाज को लेकर उस पर टीका टिप्पणी तो दुख होता है किसी वर्ग पर या धर्म पर केवल इस आधार पर वह फलाने धर्म का है अत्याचार अनाचार होता है तो उस पर भी कष्ट होता है परंतु विशेष बात यह है कि ब्राह्मण पर अत्याचार अनाचार किसी को कोई कष्ट नहीं होता यह दुख का विषय है क्या ब्राह्मण समाज का हिस्सा नहीं क्या ब्राह्मण में प्राण नहीं क्या ब्राह्मण को संवेदनाएं नहीं आखिर क्या कारण है कि हम जब बात ब्राह्मण के ऊपर अत्याचार की आती है कोई विरोध प्रदर्शन नहीं देते मेरी स्पष्ट मांग है कि राजस्थान में हुई पुजारी की हत्या की सीबीआई जांच होनी चाहिए और पिछले कुछ समय से लगातार हो रहे ब्राह्मण हत्याकांड पुजारी हत्याकांड संतो के ऊपर हमलों के और उनकी हत्या कांड की सीबीआई जांच हो कर इनके पीछे कौन लोग हैं जो इस वर्ग जाति को आक्रांत और भयभीत करना चाहते हैं उनके नाम सामने आनी चाहिए.

मैं सब से अपील करता हूं यदि में कोई आप हमें जरा सी भी संवेदना है तो इस मुद्दे की तरफ भी सरकार का ध्यान आकृष्ट कराएं यदि आप का कोई व्यक्ति कोई मित्र कोई परिचित या कोई जनप्रतिनिधि किसी विधानसभा में किसी लोकसभा में किसी राज्य सभा का विधान परिषद में है उससे भी निवेदन करें कि वह अपनी पार्टी में और इन सदनों में इस आवाज को बुलंद करें और ब्राह्मण के सम्मान के लिए ब्राह्मण के ऊपर हो रहे अत्याचार के लिए ब्राह्मणों की लगातार हो रही हत्याओं के विरुद्ध आवाज बुलंद करें ब्राह्मण समाज की वोट लेकर या ब्राह्मणों के नाम पर सत्ता में मलाई चाट रहे इन नेताओं के कालर पकड़ने की भी जरूरत है कि आखिर यह इतने नकारे और निकम्मे क्यों हैं?

जरा अंदाजा तो लगाइए यदि जो घटना राजस्थान में घटी है वह घटना परमात्मा ना करें किसी अन्य जाति वर्ग धर्म के पुजारी के साथ घटी होती आज देश में क्या हुआ होता क्या हो रहा होता और मीडिया कितना बवाल काट रहा होता मेरी इस पोस्ट की मनसा या भावना किसी जाति धर्म वर्ग व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं अपितु जनमानस की संवेदनाएं जगाने की झझकोरने की है इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में लगातार समाज को जागृत करने वाले महात्माओं के प्रति मैं आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने इस मुद्दे पर भी सोशल मीडिया पर लगातार समाज को जागरूक करने का काम किया है

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