काश कांग्रेसी विधायक रफीक खान को देश की आजादी में मुस्लिम योगदान और इतिहास का ज्ञान होता तों पाकिस्तानी कहनें वाले विधायक गोपाल शर्मा को जवाब देते?
राजस्थान की विधानसभा में कांग्रेस के मुस्लिम विधायक रफीक खान को भाजपा के विधायक गोपाल शर्मा ने उनकी देश भक्ति पर सवाल उठाते हुए उन्हें सीधा पाकिस्तानी बोल दिया?
मोहम्मद हफीज (जयपुर) : देश को आजाद हुए सात दशक से भी अधिक का समय बीत चुका है. देश में ज्यादा तर समय केन्द्र और राज्यों में कांग्रेस की सरकारों का शासन रहा है. मुस्लिम समाज की बदहाली गरिबी अशिक्षा के लिए देश की कांग्रेस सरकारों की नीतियां जिम्मेदार है. अजब तमाशा है जो इस बदहाली के जिम्मेदार है. वहीं सच्चर कमेटी बना कर भूखे बदहाल का हाल जान रहे हैं. इस पर यह कहना ठीक होगा राजनेता इस तरह गरीबों पर अहसान करते हैं पहले नजरें छीन लेते हैं फिर चश्मे दान करते हैं.
जितना मुस्लिम समाज की दुर्दशा के लिए कांग्रेस शासन की नीतियां रही है. उससे कहीं ज्यादा तथाकथित कांग्रेसी मुस्लिम नेताओं का निकम्मापन नाकारा राजनेतिक नेतृत्व जिम्मेदार है. आज भी राज्य की कांग्रेस राजनीति में नोन मेट्रिक या हायर सेकेण्डरी तक पढा लिखा मुस्लिम विधायक मंत्री बनता है जिनके पास समाज और अपने मतदाताओं को देने के लिए ना कोई विजन है और नाही कोई प्लानिंग नजर आती है. नालेज इज पावर है यह सन्देश आज से चोदह सो वर्ष पहले मोहम्मद साहब ईश्वर के दूत ने अपने मानने वालों के साथ दुनिया को दिया था. पवित्र क़ुरआन का पहला सन्देश इकरा पढ़ो अपने रब के हुक्म से यह संदेश जाहिल सियासी लीडर और धर्म की तिजारत करने वाले मोलवी दोनों भूल गए हैं. नतिजा सबके सामने है कि अपना शानदार इतिहास यह समाज भूल चुका है!
आज राजनीतिक रुप से यह समाज अछूत बना हर किसी ऐरे गेरे नत्थखेरे की नफरती सोच का शिकार बनने को मजबूर हो कर सारे झूठ बे सिर पेर के आरोप अपने माथे पर ढोये घूम रहा है.
देश का आम मूस्लिम नफरती सोच का शिकार बन कर अपने जान माल को खो रहा है अपमानित प्रताड़ित किया जा रहा है. अब तो इस अपमान का भागीदार मुस्लिम विधायक सांसद दाढ़ी टोपी धारी तक बन रहें हैं परन्तु लोकतांत्रिक ढंग से उसका विरोध जितना होना चाहिए उतना होता दिखाई नहीं देता है!
कब कोनसी बात कही जाती है यह सलीका हो तों हर बात सुनी जाती है.
राजस्थान की विधानसभा में कांग्रेस के मुस्लिम विधायक रफीक खान को भाजपा के विधायक गोपाल शर्मा ने उनकी देश भक्ति पर सवाल उठाते हुए उन्हें सीधा पाकिस्तानी बोल दिया. इस पर कांग्रेस पार्टी की और से और ना ही विधायक रफीक खान की और से जेसा विरोध होना चाहिए उतना होता दिखाई नहीं दिया. इस घटना से राज्य का आम मुस्लिम दुःखी होकर सोच रहा है कि जब हमारे माननीय विधायक की देशभक्ति को राज्य की सबसे बड़ी पंचायत में सरेआम गाली दी जा सकती है तों फिर हमारा तो भगवान ही मालिक है?
इस अत्याचारी अमानवीय स्तन ढकने के टेक्स की प्रथा को टीपू सुल्तान ने त्रांवणकोर राज्य पर हमला कर सर्व प्रथम समाप्त किया था टीपू सुल्तान को नफरती गेंग इसीलिए हत्यारा साम्प्रदायिक कह कर प्रचारित करते हैं. टीपू सुल्तान के शासन के समाप्त होने के बाद यह स्तन ढकने के कर की प्रथा शुरू हो गई.
इस घोर अमानवीय स्तन ढकने के लिए कर वसूली कानून का नांगेली नामक दलित महिला ने विरोध किया जिसके लिए उसे अपने जीवन की कुर्बानी देनी पड़ी. नांगेली ने ऐलान किया कि वह स्तनों को भी ढकेगी और स्तन कर भी नहीं देगी. इस पर राजपुरोहित राजा के आदमी नांगेली के घर जा धमके और कर वसूली के लिए धमकाने लगे नांगेली वीर महिला घर के अंदर गई और कर के रूप में अपना एक स्तन काट कर राजा के आदमीयों को दे दिया. अत्यधिक ख़ून बहने से उसकी कुछ देर में मृत्यु हो गई उसकी चिता पर उसके पति ने भी पत्नी के साथ अपनी जान दे दी!
अब जरा जहांगीर के न्याय की बात भी करले जिसने अपने महल के बाहर एक जंजीर लगाईं थी जिसमें कई घंटियां लगीं थी कोई भी पीड़ित दुःखी आदमी न्याय के लिए चोबीस घंटे उस जंजीर को खेच कर बादशाह से मिल सकता था. बादशाह हर समय पीड़ितों से मिल कर न्याय करता था संयोग से राजपूताना के राजा शक्ति सिंह का बेटा एक निर्दोष व्यक्ति को मार डालता है. उसे हत्या के बदले हत्या का दंड जहांगीर सुनाता है. जिस पर शक्ति सिंह मुग़ल साम्राज्य के प्रति अपनी वफादारी और सेवाओं के बदले अपने पुत्र की जान बख्श देने की अपील करता है. जिस पर बादशाह जहांगीर कहता है इंसाफ़ रिश्ते नाते वफादारी नहीं देखता है.
कुछ दिनों बाद जहांगीर की मलिका नूरजहां यमूना नदी किनारे पानी की जल मुर्ग़ी का शिकार करने के लिए शाही तीर से निशाना लगाती है. हवा के कारण तीर भटक कर नदी किनारे कपड़े धोने वाले धोबी को लगता है जिसकी जान चली जाती है.
राजा शक्ति सिंह तब धोबी की लाश उठाएं धोबी की पत्नी को न्याय दिलाने के लिए दरबार में आता है और जहांगीर के सामने कहता है देखते क्या अब भी बादशाह का न्याय रिश्ते नातों को देखता है. जहांगीर अपनी अपनी पत्नी को कठघरे में खड़ा कर वो ही शाही तीर मृतक धोबी की पत्नी को दे देता है और कहता है कि मेरी पत्नी ने तेरा सुहाग उजाड़ा था. अब तुझे अधिकार है चला तीर और तू इसके सुहाग को खत्म करदे जहांगीर अपना शाही लिबास उतार कर धोबन के सामने खड़ा हो जाता है.
जहांगीर तो अपना जोधाबाई का बेटा था सरकार में बैठे हुए मंत्री से पता लग जाएगा अब बनारस शहर के मुग़ल बादशाह के कोतवाल इब्राहिम की बात करते हैं. जिसने वहां के निवासी रामलाल पंडित जी की खूबसूरत जवान बेटी शकुंतला की जबरन डोली अपने महल में मांगी थी. उसके बाप से मजबूर बेटी शकुंतला तत्कालीन मुग़ल बादशाह से मिली जिसने गरीब पंडित की बेटी शकुंतला की आबरू बचाने के तहत दो हाथियों से कोतवाल इब्राहिम को विपरीत दिशा में उसकी टांगें बांधकर बीच में से चिरवाने का न्याय किया था. जिसकी याद में धनेडा मस्जिद बनवाई थी लोगों ने जिसमे सुनहरी अक्षरो में बादशाह का न्याय लिखा है. आजकल यह बादशाह नफरती गेंग का नया शिकार इसके नाम से विधायक का हाजमा खराब होना तय है इसलिए नाम से हम भी परहेज़ करते हैं!
अब जरा बात करते हैं आज के तथाकथित राम भक्तों के शासन की जंहा रावण रुपी दरिन्दे सीताओं का चीरहरण दिन दहाड़े कर रहे हैं. न्याय के पवित्र मंदिर में बेठे जजों के घर नोटों से भरे हैं. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश तक अपनी आत्मा अपने जमीर को एक राज्यसभा की सीट के बदले बेच रहे हैं. न्याय का दिन दहाड़े सोदा किया जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस तक अपने उपर लगें महिला उत्पीडन के आरोप खुद की कोर्ट में रंजन गोगोई बन सुन रहे हैं और खुद ही स्वयं को आरोप मुक्त कर रहे. देश में न्याय करनेवाले जज ही भयभीत हैं या फिर सत्ता के उपहारों के बोझ से दबे न्याय का चीरहरण कर रहे हैं. यदि कोई भाजपा सरकार का विधायक कुलदीप सेंगर किसी बेटी की आबरू उसकी इज्जत लूट ले तों न्याय केलिए मासूम बेटी के परिवार को पुलिसिया न्याय मे झूठें मुकदमों में फंसाकर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की सजा मे पीटा जाता है बेमोत मार दिया जाता है. यदि कोई न्याय के लिए लडने वाला प्रयास करता है तों देत्याकार ट्रक से दुर्घटना से उसका सामना होना निश्चित है!
हत्यारे बलात्कारी के पास अगर वोट दिलाने की ताकत है तों फिर सोने पर सुहागा है. यह सब विधायक जी आपके राम राज का न्याय है आप को सत्ता के लिए वोट चाहिए यही कारण है कि आप की पार्टी भाजपा को वोट दिलाने वाले हत्यारे बलात्कारी संत राम रहीम हर दिल्ली हरियाणा पंजाब के चुनाव से पहले जेल से बाहर होता है. वेसे आजकल देश में बोने लोगों की सरकार है ये बोने लोग सरकार में बेठ कर अपने अच्छे कामों से खुद का कद बढ़ाने के बजाए दुनिया से बरसों पहले स्वर्ग सिधार गए सम्मानित लोगों के कद को कम करने में ही अपनी सरकार की सारी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं. स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने संसद में बहस के दोरान कहा था जिस सरकार बनाने में मेरे सिद्धांतों पर आंच आती हो उसे में चीमटी से भी छूना पसंद नहीं करुंगा?
अब हत्यारे बलात्कारी संत की कृपा से हरियाणा दिल्ली चुनाव में वोट देने की अपील करवाई जाती है. आप जेसे सम्मानित विधायक जी मार्गदर्शन करें कि सत्ता प्राप्ति के लिए यह कुकर्म कहां तक उचित है.
अब देश से गोरी चमड़ी के अंग्रेज़ भाग गए हैं उनका शासन समाप्त हुए कई दशक बीत गए हैं. गोरी चमड़ी के अंग्रेजों को हिन्दू मुस्लिम एकता से नफ़रत थी क्योंकि यह एकता उनके लूट के शासन के लिए बडा खतरा थी. अब उनकी जगह आजाद भारत में काली चमड़ी के काले अंग्रेज शासन कर रहे हैं गोरे आका फूट डालो और राज करो की नीति पर चलते थे काले अंग्रेज भी फूट डालो राज करो नीति का अनुसरण कर रहे हैं.
में लिखते हैं की रानी लक्ष्मीबाई का सेनापति मीर बख्शीश अली था जों रानी लक्ष्मीबाई की लड़ाई की कमान संभालता था लेखक मृदला मुखर्जी और आदित्य मुखर्जी अपनी किताब आजादी का संघर्ष 1857 में लिखते हैं, बहादुर नाना साहब पेशवा के सेनापति अजिमुल्ला खान थे. जों उनकी लड़ाई की बागडोर संभालते थे इधर भी सेनापति मुस्लिम उधर भी सेनापति मुस्लिम था. अब बात करते हैं धार्मिक नगरी अयोध्या की घटना की जिसका उल्लेख गजट हिस्ट्री ऑफ उत्तर प्रदेश के सब पेज 37में लिखा है कि 1857 की क्राति में लड़ाई का बिगुल फूंकने वाले सबसे पहले बाबा राम शरण दास थे जिनका साथ उनके प्रिय मित्र मोलवी आमीर अली ने दिया था.
अंग्रेजों ने लोगोंके मन में दहशत डालने के लिए बाबा राम शरण दास और मोलवी आमीर अली दोनों को एक फांसी के फंदे से लटका दिया. फांसी का फंदा एक था और उस पर लटकने वाले एक हिन्दू एक मुसलमान था! बाबर बादशाह और राणा सांगा की लड़ाई में हसन खान मेवाती और इब्राहिम लोदी का भाई बहलोल लोदी राणा सांगा की और से लड़ें थे.
अकबर बादशाह और राणा प्रताप की हल्दीघाटी की लड़ाई में अकबर बादशाह का सेनापति आमेर का राजा मानसिंह था तो राणा प्रताप का सेनापति हकीम खान सूरी था. जबकि राणा प्रताप का भाई शक्ति सिंह अकबर बादशाह की ओर से लड रहा था. विधायक जी नफरति गेंग को व्हाट्स ऐप यूनिवर्सिटी का झूठा ज्ञान महज सत्ता सुख भोगने के लिए परोसने वाले पापियों का यह आचरण देश में हत्यारों की टोलियां बनाकर सड़कों पर देश के बेगुनाह लोगों का खून बहा रहा है.
देश की सम्पत्ति जला रहा है मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का नाम लेकर यह सब किया जा रहा है. कुछ शब्द इस पर भी तो बोलों मुंह तो खोलो वेसे आप चाहें तो हमें फर्जी पत्रकार लिख सकते हैं. जेसा आपकी आदत है दिन रात गोदी मीडिया यहीं तो करता है हमारे पास आर एन आई नंबर भी है पर आपके झूठ के लिए एक शेर पेशे खिदमत है.
दरबदर थे जो दीवारों के मालिक हो गये
मेरे सब दरबान दरबारों के मालिक हो गये
लफ्ज़ गूंगे हो चुकें तहरीर अंधी हो चुकी
मेरे शहर के जितने मुखबिर थे अखबारों के मालिक हो गये
विधायक रफीक खान साहब जिस कोम को अपनी तारीख़ (इतिहास) की परवाह नहीं तारीख को उस कोम की परवाह नहीं होती. वह कोम ज़िल्लत और शदीद गमों का शिकार बन गुमनामी में खो जाती है. उस कोम के रहनुमा आप जेसे ही लोग होते हैं आपके परिवार ने घाटगेट जयपुर में वक्फ बोर्ड की जमीन पर अंकूर सिनेमा हॉल बनाया है. आप बताएं इससे गरीब कोम को क्या फायदा हुआ है .शराब का कारोबार दुकानों के खुलने से गरीबों को बर्बादी के अलावा कुछ और मिला है किसका भला कैसे हुआ है इसके लिए कुछ शब्द बचे है तो वह तो बता दो!
आपकी विधानसभा क्षेत्र में एक मुस्लिम स्कूल है वह मरणासन्न अवस्था में है आपको शायद पता नहीं है वक्फ बोर्ड में शोकत कुरेशी ने क्या लूट मचाई है. आप भी बोर्ड के सदस्य थे जोधपुर शहर में आठ कब्रिस्तान ग़ायब हो गए. मुर्दों के साथ उनके कर्मों का लेखा-जोखा भी ग़ायब है. फ़रिश्ते उन्हें ढूंढ रहे हैं सज़ा ईनाम देने के लिए सुना है मुर्दा लोग कांग्रेस कार्यालय और मुस्लिम नेताओं के घरों में छिपे हैं. जिनमें घुसने से फ़रिश्ते भी डरते हैं क्या बताएं दिल के फफोले जल उठे सीने की आग से इस घर को लग गई आग घर के चिराग से जोधपुर में बेचारे मोईनुद्दीन ओवेशी साहब कब्रिस्तान बचाने की लड़ाई अस्सी की उम्र में लड रहे हैं. लतीफ आर को जेसे लोग जयपुर में कर्बला की जमीन खा गए सन्नाटा ख़ामोशी पसरी है. आवारा कोम के मसीहा सो रहे हैं सावधान उनकी नींद में खलल डालना बडा जुर्म है आज इतना ही शेष आगे इंतजार कीजिए?
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.